चलो इलाहाबाद...


--पूर्वांचल या कहिये देश भर में हर मां बाप अपने बच्चो को इंटर में डॉ या इंजीनियर बना देना चाहता है, लोग बन भी जाते हैं पहले तो कम होते थे। मनवांछित परिणाम ना मिलने का फल ये होता था कि लड़के इलाहाबाद भेज दिए जाते थे, उसमे भी जो तेज होते थे वो साइंस पढ़ने लगते थे बाकी वाले आर्ट्स यानी थर्ड केटेगरी वाले आई ए एस, पी सी यस की दौड़ में शामिल होते थे कुछ लोग अपवाद होते थे लेकिन अपवाद नियम नही होते ।

-----------इलाहाबाद आते ही संघर्ष के साथ ब्यक्तित्व का निर्माण शुरू हो जाता है, होस्टल वाला उच्च कुल का अनुभव करते हुये ऐसे निकलता जैसे प्रमुख सचिव  योजनाओं का निरीक्षण करने निकले हैं। डेलीगेसी का लड़का दबा दबा अपने को प्रतियोगी सिद्ध करने में और दाल चावल, एवं अंडा करी का सिद्धहस्त बनाने में लगा रहता था।

----------------अपने अपने जिले कस्बे में खाई गई पाव रोटी अचानक यँहा बन्द(बन) बन जाती है, तो गवईं लड़के भौचक कुछ दिन बोल ही नही पाते ।

-----"अरे मर्दवा ई तो पाव रोटी है "। बताया जाता है कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के तूफानी अध्यक्ष इंदु सिंह जब पहली बार बन्द चाय पिये तो उनके मुँह से यही निकला।

----बोले अरे यार बहुत दिन से बन्द मक्खन, बन्द मक्खन सुन रहा था, समझ में ही नही आ रहा था, "सरवा आज पता चला ई तो पाव रोटिया हौ"

--------------जौनपुर के विनोद सिंह की अमर21 साल होते ही कटरा से दर्शन शास्त्र की बड़ी बड़ी ढेर सारी किताब लेकर यूनिवर्सिटी रोड से निकल रहे थे।

----------अरे विनोद भाई नमस्कार, आइये चाय पिलाये बहुत किताबे लिए हो । संजय बोले

------ओपी दो चाय लाओ ।

-----अरे यार अब गम्भीर हो जाना है, फिलोसोफी कस के पढ़नी है।

-----अरे फिलॉसफी पढ़नी हो तो पहले "दत्ता एंड चटर्जी "और "एच पी सिन्हा" पढिये ये सब बेकार है। कहते हुए ओपी ने चाय पकड़ा के टेबल साफ करने लगे। विनोद सिंह भौचक्के होके कभी चाय देखते कभी  ओ पी को देखते । उन्हें उसके बाद पता चला कि ओपी चाय ही नहीं बेचते, सपने भी सजाते हैं, पढ़ाई की सलाह देते हैं।

----------------दिनेश कुमार पहली बार मे ही इन्टरबुय देने लोकसेवा आयोग तक पहुँच गये, सफल नहीं हुए लेकिन कोच बनने लगे ,उसी बल पे पहुच गये महिला छात्रावास, साथियों को लगा कि दिनेश तो स शरीर स्वर्ग में पहुँच गया। सुंदर और आधुनिक कन्याओं से मिलन क्या हुआ दिनेश की दुनिया ही बदलने लगी, सरसो के तेल से डिओडरेंट पे आ गए, लगा गंगा जमुना का मिलन इसी में हो जाएगा। जैसे जैसे संगम की संभावना बनने लगी दिनेश की सरस्वती विलुप्त होने लगी और देखते देखते अगला प्री फेल कर बैठे।

----------अरे तैयारी में ये सब लगा रहता है ,कहते हुए मुकेश ,संदीप दिनेश के साथ वोमेन्स होस्टल जाने का जुगाड़ लगाने लगे । कुछ ऐसे ही रोमांचक घटना, दुर्घटना होती रहती है, चलो इलाहाबाद की यात्रा में जानते रहिये, और बताते भी रहिये जिन्होंने चलो इलाहाबाद की यात्रा की हो☺️☺️☺️.

    ।। अजित सिंह।।

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