इलाहाबाद विश्वविद्यालय के गौरव ! - प्रकाश त्रिपाठी
इलाहाबाद विश्वविद्यालय,प्रयागराज से जुड़ने का सौभाग्य मुझे सन 1992 में तब हुआ जब मैंने बी.ए. में प्रवेश लिया । विषय मिला- हिंदी,मध्यकालीन इतिहास तथा अर्थशास्त्र ।उसके बाद 1996 में हिंदी से एम.ए. किया । 2001 में नेट की परीक्षा उत्तीर्ण की ।
2002 -2009 तक सी.एम.पी.डिग्री कालेज में हिंदी के अतिथि अध्यापक व सहायक कुलनुशासक के रूप में कार्य । 2002-03 में ही वचन हिंदी पत्रिका की परिकल्पना कर संपादन का कार्य आरंभ किया ।अब तक चौदह अंक प्रकाशित हो चुके हैं ।2009-2011 तक महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय,वर्धा की बहुवचन पत्रिका के सह-संपादक के रूप में कार्य ।2004 में हिंदी से ही प्रो. रामकिशोर शर्मा सर के मार्गदर्शन में डी.फिल. पूरा किया । मैं 6/48 डॉक्टर ताराचंद छात्रावास का अंतःवासी रहा ।
7 मार्च 2012 से महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में सहायक क्षेत्रीय निदेशक के रूप में कर्तव्यस्थ हूँ । अब तक एक दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं ।आज मैं जो कुछ भी हूँ अपने माता-पिता,गुरु एवं बड़ों के आशीर्वाद से हूँ ।विश्वविद्यालय की अनेक स्मृतियाँ मेरे मन-मस्तिष्क में आज भी जीवित हैं ।लल्ला चूँगी, प्रयाग स्टेशन,लक्ष्मी टाकिज चौराहा,कटरा और यूनिवर्सिटी रोड को बहुत मिस करता हूँ । यूनिवर्सिटी रोड पर नटराज भोजनालय दस रुपया में भरपेट खाना खिलाता था ।
प्राकाश त्रिपाठी
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